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हरिद्वार के बाद आज पिथौरागढ में भी महसूस हुए भूकंप के झटके, वैज्ञानिकों ने फिर चेताया

पिथौरागढ़ भूकंप

भूकंप के दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखण्ड में हिमालय की ये श्रंखलाएं आज सुबह 3 बजकर 10 मिनट में डोलने लगी। भूकंप के इन झटकों को पिथौरागढ में महसूस किया गया। जसकी तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 2.6 बतायी जा रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने ट्वीट के जरिए इस खबर की पुष्टि की। इन झटकों से जान माल के नुकसान की कोई खबर अभी तक नहीं आई है। आगे पढ़ें।
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खबर के मुताबिक आज सुबह 3 बजकर 10 मिनट पर पिथौरागढ में 2.6 तीव्रता के झटके महसूस किए गए जब पूरा उत्तराखण्ड गहरी नींद में सो रहा था। इसके कुछ दिन पहले हरिद्धार में भी भूकंप के इसी तरह के झटके महसूस किए गए। जिसकी तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 4.0 मापी गई। इस भूकंप का केंद्र बहादराबाद ब्लाॅक के औरंगाबाद क्षेत्र में डालूवाला कलां गांव था। इस भूकंप के झटके देहरादून में भी महसूस किए गए थे मगर इससे जान माल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। क्या कहना है वैज्ञानिकों का आगे पढ़ें।

वैज्ञानिकों ने किया आगाह

वैज्ञानिकों ने कुछ समय पहले हिमालय के इस क्षेत्र में बड़े भूकंप के आने की बात कही थी। वैज्ञानिकों का कहना था कि हिमालय के भीतर हो रहे परिवर्तन और प्लेटों के लगातार खिसकने के कारण छोट-छोटे भूकंप के झटकों के साथ बड़े भूकंप आ सकते हैं। हालाँकि यह कब आएगा इसके बारे में अभी ठोस अनुमान लगाना मुश्किल है। वैज्ञानिकों के कहे अनुसार इसी साल सिलसलेवार तरीके से कई झटके महसूस किये गए हैं। जिसमें रुद्रप्रयाग, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी समेत अब हरिद्धार और पिथौरागढ में भी इन झटकों को महसूस किया गया।



भू-वैज्ञानिकों ने बड़े भूकंप की आशंका पर बने रहते हुए ये कहा है कि अगर ये भूकंप आया तो इससे रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों का एक दल लगातार धरती की सेटेलाइट और थर्मल तस्वीरों पर नजर बनाए हुए है। शोध के अनुसार हिमालय के क्षेत्रों में आने वाले भूकंप के झटके इतने भीषण होंगे कि दिल्ली तक इन झटकों को महसूस किया जाएगा।

वर्ष 2015 में नेपाल में आए झटके इन्हीं भू-मंडलीय अस्थिरता का परिणाम था। नेपाल में आए वर्ष 2015 के झटकों ने 9 हजार से अधिक लोगों की जान ली थी। इसकी तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 7.9 थी। हिमालय के संवेदनशील इलाकों में हो रहे लगातार बड़े -बड़े बांधों के निर्माण को भी वैज्ञानिकों ने भूकंप का कारण माना है।

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Deepak Bisht

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