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Sidhbali Dham kotdwar | सिद्धबली हनुमान

sidhbali dham kotdwar
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सिद्धबली धाम | Sidhbali Dham

उत्तराखंड यूँ तो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए सारे विश्व में जाना जाता है वहीं यहाँ की मिट्टी में देवत्व का इतना प्रमाण मिलता है कि कोई यहाँ आये बिना रह भी नहीं पाता। इस पोस्ट में हम उत्तराखंड के एक ऐसे ही मंदिर / धाम की बात करेंगे जिसके दरसन के लिए सारे विश्व भर से लोग यहाँ आते हैं। ये मंदिर है महाबली हनुमान का सिद्धबली धाम, जिसके दर्शन से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

पौड़ी जिले के कोटद्वार में स्तिथ महाबली हनुमान के सिद्धबली धाम के प्रति लोगों की आस्था ही है की मंदिर में भंडारे करने वालो की बुकिंग पहले से ही रहती है। खबरों के अनुसार यहाँ भंडारे की वर्ष 2025 तक पहले से ही पूरी हो चुकी है।


क्या है सिद्धबली धाम में खास | What is special about Sidhbali Dham

उत्तराखंड के कोटद्वार शहर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित एक भव्य मंदिर सिद्धबली है। यह मंदिर खोह नदी के किनारे पर लगभग 40 मी. ऊँचे पहाड़ के टीले पर स्थित है जिससे कि मंदिर का दृश्य ओर भी ज़्यादा खूबसूरत दिखता है। सिद्धबली मंदिर को पौड़ी गढ़वाल का प्रसिद्ध देव स्थल भी माना जाता है और कोटद्वार शहर को गढ़वाल का प्रवेश द्वार।

इस मंदिर में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्म के लोग यहाँ मनोकामनाएं मांगने आते है। जो कि सिद्धबली आकर पूरी हो जाती है। साथ ही यहाँ दुनिया भर से श्रद्धालु आकर अपनी मनोकामना पूरी हो जाने पर भंडारा भी करवाते है। राजमार्ग से मंदिर तक पहुँचने के लिए खोह नदी पर पुल बना हुआ है, पुल पार करने के बाद मंदिर का द्वार बना हुआ है जहाँ से टीले तक पहुंचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई है जो सीधा श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर तक पहुँचाती है। यहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं द्वारा मेले का भी आयोजन किया जाता है। मंदिर के द्वार के आसपास प्रसाद व चाय, नाश्ते की दुकानें है।


सिद्धबली धाम का इतिहास | History of Sidhbali Dham

यह एक पौराणिक मंदिर है। जो कि राम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ एवं उनके शिष्यों ने यहाँ लंबे समय तक तपस्या की। जो कि बाद में सिद्ध नाम से प्रसिद्ध हुए। लोक कथा के अनुसार यहाँ तप साधना करने के बाद ही सिद्ध बाबा को हनुमानजी की सिद्धि प्राप्त हुई थी। सिद्ध बाबा ने यहाँ बजरंगबली की एक विशाल पाषाणी प्रतिमा का निर्माण किया। जिससे मंदिर का नाम सिद्धबली पड़ गया अर्थात सिद्ध बाबा द्वारा स्थापित बजरंगबली।

कहा जाता है, कि बाद में ब्रिटिश शासन काल के एक खान मुस्लिम अधिकारी अपने घोड़े से कहीं जा रहे थे जैसे ही वह सिद्धबली के पास पहुँचे तो वह बेहोश होकर गिर गए उनको सपना हुआ की सिद्धबली की समाधि पर मंदिर की स्थापना की जायें। जब वह होश में आये तो उन्होंने आसपास के लोगों को अपने सपने के बारे में बताया। पहले ये मंदिर ज़्यादा बड़ा नही था पौराणिकता और शक्ति की महत्वता के कारण श्रद्धालुओं ने इसे धीरे-धीरे एक भव्य मंदिर का रूप प्रदान किया। प्रसाद के रूप में यहाँ गुड़ की भेली चढ़ाई जाती है।

ऐसा भी माना जाता है कि कोटद्वार शहर के लोग प्राचीन समय में अपनी फसल का पहला हिस्सा भगवान सिद्धबली के मंदिर में चढ़ाते थे इसलिए सिद्धबाबा को वहाँ का भूम्याल देवता भी कहा जाता है।


कैसे पहुंचे  | How to reach

सिद्धबली धाम  उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में स्तिथ पौड़ी जिले के कोटद्वार शहर में स्थित है, जो दिल्ली से 230 किमी है और हरिद्वार से 76 कि.मी.  की दूरी पर स्तिथ है। यहाँ आप बस ट्रैन यातायात के किसी भी माध्यम से पहुंच सकते हैं।


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