History Uttarakhand

अल्मोड़ा जेल का इतिहास | History Of Almora Jail

अल्मोड़ा जेल का इतिहास | History Of Almora Jail

अल्मोड़ा जेल का इतिहास | History Of Almora Jail

अल्मोड़ा में स्थित जिला जेल जिसे अल्मोड़ा जेल के नाम से जानते हैं का ऐतिहासिक महत्व रहा है। इस जेल में स्वाधीनता आंदोलन के दौरान अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार कर रखा गया था। इनमें पं० जवाहरलाल नेहरू, खान अब्दुल गफ्फार खाँ “सीमान्त गाँधी”, आचार्य नरेन्द्र देव, प० गोविंद बल्लभ पंत आदि का नाम शामिल है।

अल्मोड़ा जेल का इतिहास | History Of Almora Jailअल्मोड़ा की इस एतिहासिक जेल की स्थापना वर्ष 1872 में की गयी। इस जेल में जवाहरलाल नेहरू को 1934-35 एंव 1945 में रखा गया। अल्मोड़ा जेल में नेहरू ने 317 दिन बिताए हैं। यही नहीं इस जेल में नेहरू ने अपनी प्रसिद्ध किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया लिखी। यही वजह है कि जिस वार्ड में नेहरू को रखा गया था उसे नेहरू वार्ड के नाम से जाना जाता है। नेहरू वार्ड को अभी भी नेहरू जी के सामाग्रियों के साथ जैसे थाली, बर्तन, कटोरा एंव रसोई घर आदि संजो कर रखा गया है।

अल्मोड़ा जेल में 1934-35 के दौरान जवाहरलाल नेहरू को उनकी ही आग्रह पर रखा गया था। क्योंकि उनकी पत्नी कमला नेहरू नैनीताल में स्थित भवाली टी०बी० सेनेटेरियम में उपचार हेतु भर्ती थी। यही वजह है वे समय-समय पर पत्नी की कुशल क्षेम की खबर रखते थे। आजादी के बाद इस जेल को नेहरू के कारण ही एतिहासिक धरोहर के समान संजो कर रखा गया।
इसे भी पढ़े – कुमाऊँ परिषद एवं उत्तराखंड में हुए कुमाऊँ परिषद के अधिवेशन

 

अल्मोड़ा जेल से जुड़े प्रश्न

अल्मोड़ा जेल की स्थापना कब हुई?
अल्मोड़ा की इस ऐतिहासिक जेल (Almora Jail) की स्थापना सन 1872 में की गई।

अल्मोड़ा जेल में नेहरू ने कौन सी किताब लिखी?
जवाहरलाल नेहरू ने अल्मोड़ा जेल में डिस्कवरी आॅफ इंडिया नामक किताब लिखी।

अल्मोड़‍ जेल में नेहरु कब रखे गए?
अल्मोड़ा जेल में नेहरू को 1934-35 व 1945 में रखा गया।

 


यह पोस्ट अगर आप को अच्छी लगी हो तो इसे शेयर करें साथ ही हमारे इंस्टाग्रामफेसबुक पेज व  यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करें। साथ ही हमारी अन्य वेबसाइट को भी विजिट करें। 

About the author

Deepak Bisht

नमस्कार दोस्तों | मेरा नाम दीपक बिष्ट है। मैं पेशे से एक journalist, script writer, published author और इस वेबसाइट का owner एवं founder हूँ। मेरी किताब "Kedar " amazon पर उपलब्ध है। आप उसे पढ़ सकते हैं। WeGarhwali के इस वेबसाइट के माध्यम से हमारी कोशिश है कि हम आपको उत्तराखंड से जुडी हर छोटी बड़ी जानकारी से रूबरू कराएं। हमारी इस कोशिश में आप भी भागीदार बनिए और हमारी पोस्टों को अधिक से अधिक लोगों के साथ शेयर कीजिये। इसके अलावा यदि आप भी उत्तराखंड से जुडी कोई जानकारी युक्त लेख लिखकर हमारे माध्यम से साझा करना चाहते हैं तो आप हमारी ईमेल आईडी wegarhwal@gmail.com पर भेज सकते हैं। हमें बेहद खुशी होगी। मेरे बारे में ज्यादा जानने के लिए आप मेरे सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ सकते हैं। :) बोली से गढ़वाली मगर दिल से पहाड़ी। जय भारत, जय उत्तराखंड।

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page