History Uttarakhand

उत्तराखण्ड “गढ़राज्य” के एतिहासिक 52 गढ़ों के नाम

उत्तराखण्ड "गढ़राज्य" के एतिहासिक 52 गढ़ों के नाम

उत्तराखण्ड में परमार वंश के उदय से पहले गढ़राज्य 52 गढ़ों में बंटा हुआ था। सर्वप्रथम राजा सोनपाल ने जब अपनी पुत्री का विवाह गुजरात से आए राजा कनकपाल से किया तो उन्होंने पुत्री के हाथ में सत्ता देकर राज्य का भार जमाई कनकपाल को सौंप दिया। फिर राजा कनकपाल ने ही गढ़वाल के चमोली जिले में चाँदपुर गढ़ किले में परमार वंश की नींव पड़ी। परमार वंश के अभ्युदय के साथ गढ़राज्य के 52 गढ़ों को परमार वंश के प्रतापी राजा अजयपाल ने विजित किया तथा चाँदपुर गढ़ से राजधानी श्रीनगर के देवलगढ़ में ले गए। देवलगढ़ में ना सिर्फ उन्होंने नए गढ़ राज्य की नींव रखी अपितु अपनी वंश की ईष्ट देवी राजराजेश्वरी का मंदिर भी बनाया। राजराजेश्वरी में अभी भी परमार वंश के इस प्रतापी राजा का ध्यान मुद्रा में चित्र अंकित किया गया है।
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नीचे परमार वंश के समय उत्तराखंड में मौजूद 52 गढ़ों के नाम दिए गए हैं। ये जानकारी डा० अजय रावत जी के उत्तराखण्ड का इतिहास और उसके संबंध में इक्टठे किए गए सबूतों व तर्कों के आधार पर है। अतः इस जानकारी को तथ्यपरक मान कर आप इन 52 गढ़ों को याद कर सकते हैं। हालाँकि अभी भी उनकी किताब में जगहों व कुछ जातियों का स्थान रिक्त है इसलिए विश्वसनीय जानाकारी के आधार पर ही हम इस पोस्ट को भविष्य में फिर अपडेट करेंगे। उत्तराखण्ड “गढ़राज्य” के एतिहासिक 52 गढ़ों के नाम नीचे पढ़ें।





उत्तराखण्ड “गढ़राज्य” के एतिहासिक 52 गढ़ों के नाम

 

चाँदपुर गढ़ – जहाँ से गढ़वाल के परमार राजवंश का उदय हुआ। राजा सोनपाल यहाँ राज करता था। राजा सोनपाल के बाद कनकपाल ने ही यहाँ परमार राजवंश की                             नींव रखी।

• कंडार गढ़ – कंडार जाति का

• देवल गढ़ – राजा देवल का

• नाग नाथ गढ़ – नागवंशी जाति का

• पोली गढ़ – बछवाण बिष्ट जाति का

• खाड़ गढ़ – खाड़ी जाति का

• कल्याण गढ़ – कल्याण ब्राह्मणों का

• बांगर गढ़ – नागवंशी राणा जाति का

• साँकरी गढ़ – राणा जाति का

• रामी गढ़ – राणा जाति का

• कुईली गढ़ – सजवाण जाति का

• भरपूर गढ़ – सजवाण जाति का

• कुज्जड़ी गढ़ – सजवाण जाति का

• सिल गढ़ – सजवाण जाति का

• लोद गढ़ – लोदी जाति का




• रैका गढ़ – रमोला जाति का

• मोल्या गढ़ – रमोला जाति का

• मुंगरा गढ़ – रावत अथवा रौतेलों का गढ़

• उपू गढ़ – चौहान जाति का

• चाला गढ़ – देहरादून में मौजूद था

• विराल्टा गढ़ – रावत जाति का

• चौंडा गढ़ – चौंडाल जाति का

• रामी गढ़ – खाति जाति का

• तोप गढ़ – तोपवालों का

श्री गुरु गढ़ – (पडियार जाति का)

• लोहाब गढ़ – लोहबान नेगी

• बधाण गढ़ – बधाणी जाति का

• दशोली गढ़ – मानवर राजा

• धौना गढ़ – धौन्याला जाति का

• लंगूर गढ़

• बाग गढ़ – बागड़ी जाति का

• इड़िया गढ़ – इड़िया जाति का




• परासू गढ़

• लोदन गढ़

• रतन गढ़ – धमादा जाति का

• गढ़कोट गढ़ – बगड़वाल बिष्ट

• गढ़तांग गढ़ – भोटिया जाति का

• बन गढ़

• भरदार गढ़

• चौंद कोट गढ़ – चाँद कोटिका में

• नयाल गढ़ – नयाल जाति का

• अजमीर गढ़ – पयाल जाति का

सावली गढ़

• बदलपुर गढ़

• संगेला गढ़

• गुजड़ू गढ़

• जौट गढ़

• जौनपुर गढ़

• चंपा गढ़

• कारा गढ़

• भुवना गढ़

कौड़ गढ़ – रावत जाति का

 

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Deepak Bisht

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  • […] कुटिला लिपी में बागेश्वर, कंडारा, पाण्डुकेश्वर एंव बैजनाथ से मिले ताम्र अभिलेखों से इस कत्यूरी वंश के एतिहासिक साक्ष्य मिलता है कि यह राजवंश उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में प्रथम राजवंश था। उत्तराखण्ड के इतिहास को लिखने वाले अंग्रेजी इतिहासकार एटकिन्सन के अनुसार कत्यूरी वंश ( कार्तिकेयपुर राजवंश) की सीमा उत्तर में तिब्बत कैलाश, पूर्व में गण्डकी तथा दक्षिण में कठेर (रुहेलखण्ड) तक विस्तृत था। बागेश्वर लेख में मिले लेख से पता चलता है कि उत्तराखण्ड में कत्यूरी राजवंश बसन्त देव ने की थी। बसन्त देव को परम भट्टारक महाराजधिराज परमेश्वर की उपाधि से संबोधित किया जाता था। आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें – उत्तराखंड के ऐतिहासिक 52 गढ़  […]