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World Photography Day : क्यों मनाते हैं विश्व फोटोग्राफी दिवस? और क्या है इसका इतिहास? जानिए

world photography day in hindi
pixabay

आज पूरी दुनिया एक दूसरे से कनेक्टेड है और इसका श्रेय सोशल मीडिया को जाता है।  हम सोशल मीडिया के जरिए दुनिया  के हर कोने के बारे में  जान रहे हैं। मगर तस्वीरों  ने जानकारियों के इस दौर को और भी नजदीक ला खड़ा कर दिया है। अब न हम सिर्फ दुनिया के बारे में जान रहे हैं बल्कि उन्हें आँखों से देख कर महसूस भी कर रहे हैं।  एक दौर था जब फेसबुक ने पहली बार दुनिया में कदम रखा। हर किसी ने इस सोशल साइट को बातचीत करने और जुड़े रहने का माध्यम के रूप में अपनाया।  मगर वर्ष 2010 में जब इंस्टाग्राम ने कदम रखा तो लोगों ने जाना की हम तस्वीरों के माध्यम से भी संवाद कर सकते हैं। और अब स्तिथि ये है कि पूरी दुनिया में  सोशल साइट पर हर दिन 3 बिलियन से भी ज्यादा तस्वीरेँ अपलोड होती हैं। जिससे पता चलता है कि तस्वीरें संवाद का कितना महत्वपूर्ण जरिया है। परआपने कभी सोचा इसकी शुरुवात कहां से हुई ? और हम विश्व फोटोग्राफी दिवस क्यों मनाते हैं ?

विश्व फोटोग्राफी दिवस का महत्त्व व इतिहास

इस दिन की उत्पत्ति डागेरोट्राइप के आविष्कार में निहित है, यह एक फोटोग्राफिक प्रक्रिया थी जिसे 1837 में फ्रेंचमैन लोइस डागुएरे और जोसेफ नाइसफोर निएपे द्वारा विकसित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, 9 जनवरी, 1839 को फ्रेंच एकेडमी ऑफ साइंसेज ने डागेरोट्राइप को लेकर एक घोषणा की। इसके  10 दिनों के बाद, फ्रांसीसी सरकार ने पेटेंट प्राप्त किया और बिना किसी कॉपीराइट को जारी करे उन्होंने कहा यह अविष्कार दुनिया के लिए एक तोहफा है।




क्यों मनाते हैं विश्व फोटोग्राफी दिवस

विश्व फोटोग्राफी दिवस को मनाने का प्रमुख उद्देश्य है कि  विश्व के तमाम लोग तस्वीरों के जरिये बिना कुछ कहे एक संवाद स्थापित कर सके तथा अपनी भावनाओं को तस्वीरों के माध्यम से उजागर करें। इसके साथ ही इस दिन को मनाने का कारण लोगों को करियर के तौर पर फोटोग्राफी अपनाने के लिए प्रेरित करना है तथा उन्हें एक मंच देना है

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दुनिया की पहली सेल्फी

आज हर कोई सेल्फी का दीवाना है जिसे देखो अपने सोशल स्टेटस पर एक सेल्फी लगा कर अपने आप को प्रदर्शित करता है। और यह महज एक दिन की बात नहीं बल्कि आज  हर घंटे लोग अपनी तस्वीरों या स्टेटस के जरिये अपडेटेड दिखना चाहते हैं और सेल्फियां इसमें महत्वपूर्ण रोल अदा करती हैं।  सेल्फियों के इस दौर की शुरुवात हुई आज से 181 साल पहले जब अमेरिका के एक उत्साही फोटोग्राफर रॉबर्ट कॉर्नेलियस ने अपना कैमरा स्थापित किया था, और लेंस कैप को हटाकर वह फ्रेम में भाग गया जिसके बाद उसकी छवि  क्लिक हो गयी। 1839 में रॉबर्ट द्वारा खींची गयी अपनी  यह तस्वीर उसे नहीं मालूम था कि विश्व की पहली सेल्फी बन जाएगी। इस तस्वीर के पीछे रॉबर्ट ने लिखा था , “1839 में पहली बार ली गई  तस्वीर”।

मौजूदा दौर में सेल्फी एक ट्रेंड हो गया है। आज बिना सेल्फी के कोई भी समारोह में ली गयी तस्वीरें अधूरी रहती हैं। सेल्फी के बढ़ते इसी पागलपन के कारण  दुनिया की तमाम मोबाइल कंपनियों में बहतरीन फ्रंट कैमरा देने को होड़ लगी है।



 


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Deepak Bisht

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