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हर की दून वैली ट्रेक | Har ki Doon Valley Trek

हर की दून वैली
pic - @the_wandererdoc

प्रकृति की खूबसूरती का जब भी ज़िक्र आता है तो उत्तराखंड उसके हाशिये पर चमकता दिखता है। भारत के इस पहाड़ी प्रदेश में बुग्याल, झरने, नदियां और बर्फीली चादर ओढ़े चमकते पहाड़ हर किसी का मन मोह लेते हैं । ऐसी ही एक खूबसूरत घाटी है उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जिसे हर की दून वैली के नाम से जाना जाता है। हर की दून हर साल पर्यटकों को अपनी ओर लुभाता है इसका कारण है यहां उपस्थित हरियाली, स्वच्छ नीला आसमां, मद्धम बहती ठंडी हवा और नीले रंग में साँप सी लहरती सूपिन नदी। जो यहाँ आता है यहीं का होकर रह जाता है।


हर की दून वैली ट्रेक

हर की दून वैली समुद्रतल से 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक अत्यंत दुर्गम अंचल है । उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हर की दून को ईश्वर की भूमि भी कहा जाता है। यहां यमुना नदी की सहायक नदियां रूपिन व सुपिन का उद्गमन भी होता है। उत्तर में हिमाचल पूर्व में तिब्बत से लगा हर की दून का इलाका गोविन्द पशु विहार वन्य जीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है।



यहां आने वाले पर्यटकों को अद्भुत शांति और प्रकृति की सुंदरता का अनुभव मिलता है। हर की दून विशेषतया ट्रैकिंग स्पॉट के रूप में जाना जाता है। पर्यटक 21000 फीट की ऊंचाई वाली स्वर्गारोहिणी चोटी को भी यहां से देख सकते हैं। यहां उपस्थित जौन्धार ग्लेशियर से ही रूपिन व सुपिन नदियों का उद्गमन होता है।

यो 8 दिन का ट्रैक है जो देहरादून से शुरू होता है और देहरादून पर ही ख़त्म होता है। इस ट्रैकिंग के दौरान ट्रैकर्स गढ़वाल की 5 खूबसूरत जगहों संकरी, ताल्लुका, ओसला, हर की दून और जंदहार की खूबसूरती का आनन्द लेते हैं।

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हर की दून वैली में क्या-क्या है खास?

हर की दून वैली
pic – @sandeep.pant_

हर की दून वैली को स्वर्गा रोहिणी चोटियों के दर्शन का एक अहम स्थान माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में रजिस्टर व अन्य कारणों सहित इसी शिखर से स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया था। हर की दून से स्वर्गारोहिणी पर्वत के दर्शन होते हैं। यही नहीं हर की दून वैली गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान के अन्तर्गत आता है।

गोविंद राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1980 में की गई थी। यह राष्ट्रीय पार्क 472 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है। यह पूरा क्षेत्र जीव संरक्षित क्षेत्र होने के कारण इस यात्रा पर आप भालू , हिम तेंदुआ, काला भालू, मोनाल आदि पशु पक्षियों को देख सकते हैं । हाल ही में उत्तराखंड सरकार द्वारा हिम तेंदुओं को देखने के लिए भी एक विशेष ट्रैकर्स दल की योजना लागू की गई है। जिनकी मदद से आप भी इस दुर्लभ जीव को देख सकते हैं।




कहाँ से शुरू होती है हर की दून यात्रा?

1. हर की दून यात्रा 18 दिन लम्बा ट्रैक है जिसकी यात्रा पर आप संकरी, ताल्लुका, ओसला, हरकीदून और जन्दहार इन खूबसूरत इलाकों को देख सकते हैं। हर की दून यात्रा का सबसे उत्तम समय मई से सितम्बर माना जाता है।

2. हर की दून यात्रा के दौरान सबसे पहले देहरादून से करीबन 6 घंटे की यात्रा कर पर्यटक संकरी में पहुंचते हैं। संकरी से ही हर की दून यात्रा का ट्रैक शुरू होता है।

3. ट्रैकर संकरी से 12 किलोमीटर का ट्रैक करके ताल्लुका पहुंचते हैं जहां पर टेंट लगाकर कुछ देर विश्राम किया जाता है।

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4. इसके बाद शुरू होता है तालुका से ओसला तक की यात्रा। उर्सला तालुका से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसके लिए उच्च हिमालय के सघन जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है।



6. ओसला पर पहुंचने के बाद यात्री कुछ देर विश्राम करते हैं फिर अगले दिन 11 किलोमीटर का ट्रैक करके यात्रा के अंतिम पड़ाव हर की दून की चढ़ाई शुरू करते हैं। हर की दून यात्रा में प्रकृति के मनमोहक दृश्यों, घाटियों, घास के मैदानों और विशाल पहाड़ों की सुन्दर छटा देखने को मिलती है। यहीं से स्वर्गारोहिणी पर्वत शिखर और जंदार ग्लेशियरों का नजारा भी देखने को मिलता है।

7. यात्री चाहें तो हर की दून से ही वापस लौट सकते हैं। मगर कुछ साहसिक यात्री हर की दून से जंदार ग्लेशियर की 15 किलोमीटर यात्रा भी करते हैं।

8. इन समस्त उच्च हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा के बाद यात्री वापस तलहटी पर लौट आते हैं। और फिर देहरादून अपने अपने गंतव्य स्थानों पर लौट जाते हैं।

 


कैंसे पहुंचे हर की दून?

 

सड़क मार्ग – हर की दून यात्रा के लिए यात्री सड़क मार्ग से उत्तरकाशी पहुंचते हैं। देहरादून से 6 घंटे की यात्रा के बाद संकरी तक पहुंचते हैं। यहीं से यात्रा शुरू होती है।

हवाई अड्डा – सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट है जौलीग्रांट से हर की दून तक की दूरी 107 किलोमीटर है। आप हवाई अड्डे से टैक्सी करके आसानी से संकरी तक पहुंच सकते हैं।

रेलवे स्टेशन – यहां सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन देहरादून रेलवे स्टेशन हैं। देहरादून रेलवे स्टेशन से हर की दून तक की दूरी 98 किलोमीटर है।

 

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Deepak Bisht

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