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 औली : “एक खूबसूरत पर्यटक केंद्र” | Auli A Beautiful Travel Destination

 औली

उत्तराखंड के चमोली जिले में औली (Auli) एक खूबसूरत  हिल स्टेशन है। चारों तरफ से खूबसूरत पहाड़ी से घिरा यह हिलस्टेशन समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ है। जैव विविधता की दृष्टि से औली एक समृद्ध क्षेत्र है। औली को अगर खूबसूरती के लिहाज से देखा जाए तो यूं समझ लीजिए कि प्रकृति ने इसकी खूबसूरती में  कोई कमी नहीं छोड़ी है। 

सफेद कपास सी कोमल बर्फ , ऊँची नीची पहाड़ियाँ , हरे मखमल से घास के मैदान , शुद्ध हवा , सीधे प्रकृति से प्राकृतिक जल और सुकून जो आज की दौड़ भाग की जिंदगी में सबसे जरूरी है । इसलिए पहाड़ी पर बसे इस खूबसूरत हिलस्टेशन को  अगर उत्तराखंड का मिनी कश्मीर या स्विट्जरलैंड कहा जाए तो अतिशोक्ति नहीं होगी।



 

यही नहीं औली में एशिया की सबसे लंबी रोपवे है जिसकी कुल 4.15 किमी की दूरी तय करती है। यहाँ बने फाइबर ग्लास के छोटे-छोटे घर, स्नो पॉड्स इस खूबसूरत हिल स्टेशन को और करीब से जानने का मौका देती है। यूँ तो औली के बारे में बहुत सी रोचक जानकारियाँ हैं मगर उन सबसे पहले औली का इतिहास जान लेते हैं। 


औली का इतिहास | Auli History

 

ऐसा माना जाता है की 8 वी शताब्दी मे आदि शंकराचार्य जी इस स्थान पर आए थे । इस जगह को बुग्याल भी कहा जाता है जिसका मतलब होता है “घास का मैदान “। 1942 में अंग्रेजी डिप्टी कमिश्नर बर्नेडे औली पहुंचे और यहां की अलौकिक खुबसूरती से इतने प्रभावित हुए कि हर बार औली आए। 25 मार्च 1978 में यहां भारतीय पर्वतारोहण और स्कीइंग संस्थान की स्थापना हुई। 

औली को पर्यटन के लिहाज से खोला गया था।  जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा  था तो तत्कालीन सरकार ने पर्यटन के लिहाज से इसके विकास के लिए वर्ष 1993 में रोपवे का संचालन किया। यह रोपवे एशिया की सबसे लंबी रोपवे है। यही नहीं उत्तराखंड के एक अलग राज्य बनने पर औली को विश्व भर में पहचान देने के लिए स्किंग खेलों का आयोजन शुरू किया गया। इसके लिए फ्रांस से विशेष मशीनों को भी मंगाया गया जो बर्फ की कमी होने पर कृत्रिम रूप से बर्फ का निर्माण कर सके। 


औली में देखने के लिए खास क्या है ?

 औली

औलोकिक खूबसूरती : अगर आप प्रकृति को करीब से महसूस करना चाहते हो तो औली आ कर कुछ दिन ठहरकर बिताइए । यहां की आलौकिक खुबसूरती आपको निराश नहीं करेगी। औली की खूबसूरत वादियों में आप किताब लेकर या गर्मा गर्म चाय/कॉफी का प्याला लेकर घंटो प्रकृति के सुन्दर चित्रों को देख कर एकांत में बिता सकते हैं। वहीं यहाँ होने वाले खेलों आनंद लेकर एक अच्छा वक्त बिता सकते हैं। यहाँ स्किंग के अलावा ट्रेकिंग का भी आप लुत्फ़ ले सकते हैं। औली के पास ही बहुत सी खूबसूरत जगह हैं जिनके बारे में आपको नीचे बताया जाएगा। 

कृत्रिम झील : 25 हजार किलो लीटर की क्षमता वाली इस झील को 2010 में बनाया गया था । इस झील से नंदादेवी पर्वत माला का नजारा देखते ही बनता है।  सर्दियों में जब आश्यकता से कम बर्फ बारी होती है तो  इस झील का उपयोग कर बर्फ बनाई जाती है। कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए फ्रांस की मशीनों को प्रयोग किया जाता है । शीत क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए इस झील का बर्फ बनाने के लिए उपयोग किया गया है । हर साल यहाँ स्नो गेम्स का भी आयोजन किया जाता है। 




गुरसौं बुग्याल : गुरसौं बुग्याल हरे घास के मैदान के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि यहां पहुंचने के लिए थोड़ा चढ़ना होगा परन्तु यहां पहुंच कर आप प्रकृति की खूबसूरती का आंनद ले सकते है । यह औली से 3 कम की दूरी पर स्थित है। यह वसंत के मौसम मे हरी घास की चादर ओढ़ लेती है और सर्दियों के मौसम में बर्फ की चादर ओढ़ लेती है। गुरसौं बुग्याल से नंदादेवी, त्रिशूल और द्रोण पर्वतों का नजारा देखते ही बनता है। 

छत्तरकुण्ड : छत्तरकुण्ड एक दूसरी झील है जो औली का मुख्य आकर्षण है। यह झील औली से महज 4 किमी की दूरी पर स्तिथ है। यह गुरसौं बुग्याल से 1 km  की दूरी पर है । देवदार, ओक के वृक्षों से घिरी इस झील की खूबसूरती देखते ही बनती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का नजारा यहां से  देखते ही बनता है। नारंगी, लाल सूर्य को देखने पर्यटक इस झील के पास सुबह जल्दी आ जाते हैं ताकि अपने कैमरे खूबसूरत तस्वीरों को कैद कर सकें। 

चिनाब झील : यह झील हरे भरे जंगल, ओक और देवदार के बीच में बनी है । हालांकि इस सुंदर झील की खूबसूरती देखने के लिए आपको चल कर वहां तक पहुंचना पड़ेगा पर इस झील की खुबसूरती आपको निराश नहीं करेगी बस आपको कुछ दूर ट्रेकिंग करनी होगी। ट्रेकिंग करने के बाद जो नजारा आपको देखने को मिलेगा वो किसी महंगे तोहफे से कम नहीं होगा। बसंत के मौसम में इस झील की खूबसूरती देखते ही बनती है। यह झील जीएमवीएन (GMVN) गेस्ट हाउस से महज दो किमी दूरी पर स्तिथ है। चिनाब झील देखने  में तो प्राकृतिक झील लगती है मगर ये एक कृत्रिम झील है जिसे पर्यटन के हिसाब से बनाया गया है। 

रोपवे मार्ग जोशीमठ से औली तक एशिया का सबसे लंबा रोपवे मार्ग स्थित है जिसकी दूरी 4.15 km है। औली में मौजूद रोपवे का वर्ष 1993 में शुरू की गयी थी।  यह रोपवे जोशीमठ से देवदार के घने जंगलों से होते हुए समुद्र से दस हजार फीट की ऊंचाई से ले जाते हुए औली ले जाता है । रोप वे से जाते हुए आप औली की खूबसरती का आनंद ले सकते हो।  

हनुमान जी का भव्य मंदिर : रामायण काल में जब हनुमान जी संजीविनी बूटी लेने हिमालय आए तो उन्होंने औली मै एक टीले पर खड़े हो कर औली से द्रोणागिरी पर्वत को देखा ,यही से उन्हें संजीवीनी बूटी का दिव्य प्रकाश नजर आया। औषधीय गुणों से भरी औली को “संजीवनी शिखर “ भी कहा जाता है । और इसी “संजीवनी शिखर” पर हनुमान जी का भव्य मंदिर है । अगर आप जोशीमठ से रोड से जाते हो तो मंदिर औली के प्रारंभ में ही स्थित है, और यही आप रोप वे से जोशीमठ से औली जाते हो तो आपको 1.5 km उतारना होगा।



भविष्य बद्री : उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ से 21 किमी की दूरी पर स्थित है भविष्य बद्री मंदिर, जो कि पंचबद्री में से एक है। भविष्य बद्री उत्तराखंड के पंचबद्री बद्रीनाथ, योग-ध्यान बद्री, आदिबद्री, वृद्ध बद्री में सम्मलित  है। अगर आप धार्मिक और एडवेंचर दोनों साथ चाहते है तोह भविष्य बद्री का ट्रैकिंग आपके लिए उपयुक्त होगा । यहां ट्रैकिंग के लिए आप साल के किसी भी माह में आ सकते है ।

इसे भी पढ़ें –  भविष्य बद्री के बारे में सम्पूर्ण जानकारी 

 

फूलों की घाटी : यह 13 km  लंबा ट्रैकिंग मार्ग है । जहां से पर्यटक लगभग 3 km फूलों की घाटी घूम सकते है ।फूलों की घाटी भ्रमण के लिये जुलाई, अगस्त व सितंबर के महीनों को सर्वोत्तम माना जाता है। सितंबर में ब्रह्मकमल खिलते।

त्रिशुल पर्वत :  त्रिशूल पर्वत तीन चोटियों का समूह है इसलिए तीनों पर्वतों की चोटियों को देखते हुए भगवान शिव के अस्त्र त्रिशूल का नाम दिया गया है। त्रिशूल पर्वत को चमोली और बागेश्वर जिले से देखा जा सकता है । हाथी, घोड़ा और पालकी पहाड़ियों की श्रृंखला के कारण यह औली में एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है।

नंदादेवी पर्वत

नंदा देवी पर्वत : नंदा देवी पर्वत दुनिया की 23वीं सबसे ऊँची चोटी है। वहीं 7817 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ यह भारत की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है। औली से इस पर्वत चोटी का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है। शाम के वक्त जब सूर्य की सुनहरी किरणें इसके शिखर पर पड़ती हैं तो यह सोने सा चमकने लगता है। 

नंदा देवी श्रृंखला पूर्व में गौरी गंगा तथा पश्चिम में ऋषिगंगा घाटियों के बीच स्थित है। इस पूरे क्षेत्र को नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया है जहां पर्यटक जैव विविधता का लुफ़्त उठा सकते है ।

तपोवन : तपोवन का अर्थ अगर हम समझे तो तपोवन में तप का अर्थ ध्यान से है और वन का अर्थ जंगल । तपोवन जाते हुए आप एक अधिक शांत घाटी में पहुंचते हैं, जहां हरे एवं पीले चबूतरी खेतों के अलावा द्रोणगिरि एवं भविष्य बद्री के पर्वतों का दृश्य  है। सोलधार तपोवन गर्म पानी के स्रोत के लिए प्रसिद्द है । भगवान शिव एवं उनकी पत्नी पार्वती को समर्पित इन जलाशयों के निकट एक गौरी शंकर मंदिर है। माना जाता है कि भगवान शिव को पतिरूप में पाने के लिये इसी जगह पार्वती ने कई वर्षों तक तप किया था। माता पार्वती की शिव को पति रूप में पाने की तपस्या यही सफल हुई थी।

 यह स्थान जोशीमठ औली से 15 km दूर है । तपोवन से 3km आगे सड़क के दाहिने किनारे पर गर्म पानी का स्रोत है जो  सलधर-गर्म झरना के नाम से प्रसिद्ध है । इस स्थान को लेके एक दिलचस्प कहानी है । जब लक्ष्मण युद्ध में घायल हो गए थे तोह भगवान राम ने हनुमान को संजीवनी बूटी लेने के लिए हिमालय की तरफ भेजा।  रावण ने हनुमान को रोकने के लिए एक भयंकर राक्षस  कालनेमि को भेजा । हनुमान जी का मार्ग अवरू्ध करने पर हनुमान जी ने यही पर  राक्षस का वध किया था इसीलिये यहां का कीचड़ एवं जल रक्त की तरह लाल है।



साहसिक खेल : अगर आप स्कीइंग के शौकीन है या आप स्कीइंग सीखना चाहते हो तो औली दोनों के लिए बेहतरीन स्थान है । गढ़वाल मंडल विकास द्वारा यहां 7 दिवसीय नॉन सर्टिफिकेट और 14 दिवसीय सर्टिफिकेट ट्रेनिंग दी जाती है । स्नो स्कीइंग के लिए नवंबर से मार्च तक आना सही समय होता है। 

स्की करने के लिए पैसे व्यस्कों से रू. 475 और बच्चों से रू. 250 शुल्क लिया जाता है। स्की सीखाने के लिए रू. 125-175, दस्तानों के लिए रू. 175 और चश्मे के लिए रू. 100 शुल्क लिया जाता है। 7 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से रू. 4,710 और विदेशी पर्यटकों से रू. 5,890 शुल्क लिया जाता है। 14 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से रू. 9,440 और विदेशी पर्यटकों से रू. 11,800 शुल्क लिया जाता है। हो सकता है अब यह रेट बढ़ गए हों। 

 

ट्रैकिंग : ट्रैकिंग के शौकीन वक्तियो के लिए औली से कई खूबसूरत और एडवेंचर से भरे ट्रैकिंग मार्ग है। आप औली से दूनागिरी, मन पर्वत, नंदा देवी , कामेत जैसे लंबे ट्रैकिंग मार्ग चुन सकते है या फिर रेंज गोर्सन, टाली, कुआरी पास, खुलारा और तपोवन जैसे छोटे ट्रैकिंग मार्ग भी चुन सकते है ।

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 औली


कब आए औली? 

वैसे तो आप पूरे साल में किसी भी वक्त औली आ सकते है परन्तु अगर आप बर्फ देखना चाहते है तोह नवंबर से लेके मार्च तक का वात उपयुक्त रहता है ।





कैसे पहुंचे औली? | How to Reach Auli

  • हवाई मार्ग : औली से निकटम एयरपोर्ट देहरादून में स्थित जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है जो एक अन्तेर्देशीय हवाई अड्डा है। जिसकी दूरी औली से लगभग 279 किमी. है । यहां से औली के टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध ।
  • ट्रेन द्वारा : औली से निकटम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश में स्थित है। स्टेशन से आप बस या टैक्सी से औली पहुंच सकते है । ऋषिकेश के अलावा हरिद्वार और देहरादून रेलवे स्टेशन से भी आप औली पहुंच सकते है ।
  • रोड द्वारा : दिल्ली(500km) ,देहरादून (298km) , हरिद्वार ( 277km) , ऋषिकेश( 256) से बस सेवा औली के निकट स्थान जोशीमठ तक नियमित रूप से चलती रहती है । और जोशीमठ से औली 16 किमी.मी दूर है यहां से भी टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध हैं .

  

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About the author

Deepak Bisht

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